Saturday, October 16, 2010

जिन्दगी





जिन्दगी


हर बात का मतलब साफ हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
हर जिस्म पर लिहाफ हो,
ज़रूरी तो नहीं ?

मिलने से ही, प्रीत पूरी हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
साथ रहने से, दिलों मे दूरी न हो,
ज़रूरी तो नहीं ?

हर खर्च का हिसाब हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
हर कहानी पर किताब हो,
ज़रूरी तो नहीं ? ..........

इन्तजार...


इन्तजार...

पटरी को रेल का
बच्चों को खेल का
लता को बेल का
इन्तजार है

शाम को रात का
चूल्हे को भात को
दुल्हन को बारात का
इन्तजार है.

चिडियों को किरणों का
वन को हिरणों का
जूतों को चरणों का
इन्तजार है.

कमजोर को हाथ का
राही को साथ का
कलम को दवात का
इन्तजार है....