Sunday, June 12, 2011

अक्सर ...


अक्सर तुमको देखा है 
मैंने अपने खाबों में 
क्या तुमको भी मेरी याद आती है 
लम्बी काली रातों में ?

अक्सर दिल यह चाहता है 
तुमको भर लूँ बाहों में 
क्या तुमको भी अरमान है 
संग संग चलें हम राहों में ?

अक्सर ख़ामोशी कहती है 
तुम पास हमारे आ जाओ 
क्या तुम भी सपनो में 
हमें कहते हो की रह जाओ ?

अक्सर मन पंख लगाके उड़ चलता है 
तुमसे मिलने कोसों दूर 
क्या तुम भी यूँही जूझते हो 
क्यूँ दो दिल हैं मजबूर ?

Friday, June 10, 2011

अब के इंतज़ार में दर्द कुछ खास है !!!

अब के इंतज़ार में दर्द कुछ खास है !!!

दूरियों में भी नजदीकी का अहसास है ..

तुम्हारा एक रूप जो मेरे पास है .....

उससे ही अब जीवन की हर आस है ........

Saturday, October 16, 2010

जिन्दगी





जिन्दगी


हर बात का मतलब साफ हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
हर जिस्म पर लिहाफ हो,
ज़रूरी तो नहीं ?

मिलने से ही, प्रीत पूरी हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
साथ रहने से, दिलों मे दूरी न हो,
ज़रूरी तो नहीं ?

हर खर्च का हिसाब हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
हर कहानी पर किताब हो,
ज़रूरी तो नहीं ? ..........

इन्तजार...


इन्तजार...

पटरी को रेल का
बच्चों को खेल का
लता को बेल का
इन्तजार है

शाम को रात का
चूल्हे को भात को
दुल्हन को बारात का
इन्तजार है.

चिडियों को किरणों का
वन को हिरणों का
जूतों को चरणों का
इन्तजार है.

कमजोर को हाथ का
राही को साथ का
कलम को दवात का
इन्तजार है....