अक्सर तुमको देखा है
मैंने अपने खाबों में
क्या तुमको भी मेरी याद आती है
लम्बी काली रातों में ?
अक्सर दिल यह चाहता है
तुमको भर लूँ बाहों में
क्या तुमको भी अरमान है
संग संग चलें हम राहों में ?
अक्सर ख़ामोशी कहती है
तुम पास हमारे आ जाओ
क्या तुम भी सपनो में
हमें कहते हो की रह जाओ ?
अक्सर मन पंख लगाके उड़ चलता है
तुमसे मिलने कोसों दूर
क्या तुम भी यूँही जूझते हो
क्यूँ दो दिल हैं मजबूर ?
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