इन्तजार...
पटरी को रेल का
बच्चों को खेल का
लता को बेल का
इन्तजार है
शाम को रात का
चूल्हे को भात को
दुल्हन को बारात का
इन्तजार है.
चिडियों को किरणों का
वन को हिरणों का
जूतों को चरणों का
इन्तजार है.
कमजोर को हाथ का
राही को साथ का
कलम को दवात का
इन्तजार है....
Aur post ko comment ka intezaar hai :)
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