जिन्दगी
हर बात का मतलब साफ हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
हर जिस्म पर लिहाफ हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
मिलने से ही, प्रीत पूरी हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
साथ रहने से, दिलों मे दूरी न हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
हर खर्च का हिसाब हो,
ज़रूरी तो नहीं ?
हर कहानी पर किताब हो,
ज़रूरी तो नहीं ? ..........
wah wah kya baat hai ..."har kahani pe kitab ho jaroori to nahin " wah
ReplyDeleteso touchy...
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